Monday, October 25, 2021

Why Support BJP?

हम बीजेपी का समर्थन क्यों करते है 

धर्म और अधर्म के बीच में यदि आप न्यूट्रल रहते है तो आप अधर्म का साथ देते है , एसा श्रीकृष्ण ने कहा है 

भीम ने गधा युद्ध के नियम तोड़ते हुए दुर्योधन को मारा , बालराम बीच में आ गए और भीम की हत्या करने की ठान ली |

श्रीकृष्ण ने कहा आपको कोई अधिकार नहीं है इस युद्ध में अब बोलने का

आप न्यूट्रल रहना चाहते थे न कौरवो का न पांडवो का साथ देना पड़े इसलिए आप चुप चाप तीर्थ यात्रा का बहाना करके निकल लिए |

भीम को दुर्योधन ने विष दिया आप न्यूट्रल रहे 
पांडवो को लाक्षा गृह में जलाने का प्रयास किया गया , आप न्यूट्रल रहे 
द्यूत क्रीडा में छल किया गया , आप न्यूट्रल रहे 
द्रौपदी का वस्त्रहरण किया  , आप न्यूट्रल रहे 
अभिमन्यु की सारे युद्ध नियम तोड़ते हुए हत्या की गयी , आप कुछ बोलने नहीं आय 

आपने न्यूट्रल रह कर , मौन रह कर , दुर्योधन के हर अधर्म का  साथ ही दिया | अब आपको कोई अधिकार नहीं है की कुछ बोले |

सूरत में बम ब्लास्ट करवाने वाले मोहम्मद सुरती कांग्रेस सरकार में मंत्री थे 

दिल्ली में दंगे करवाने वाले केजरीवाल के ताहिर हुसैन थे 

यूपी में दंगो के मास्टर माइंड सपा के आजम खान थे 

गोधरा में ट्रेन जलवाने वाले कांग्रेस के पार्षद थे 

मुफ़्ती मोहम्मद सैइद , जब गृहमंत्री बने तो कश्मीर में नरसंहार करवा गया 

मुंबई हमले को हिन्दू आतंकवाद साबित करने में कांग्रेस और सभी सेकुलर पार्टिया लगी रही , वो तो भला हो तुकाराम का जिन्होंने कसाब को जिन्दा पकड़ लिया था |

मुंबई में सीरियल ब्लास्ट करवाने में कांग्रेस के सांसद के बेटे संजय दत्त का सहयोग था |

ममता बनर्जी ने बंगाल में अभी क्या करवाया 

शाहबुद्दीन हो , मुख्तार अंसारी हो एसे की संरक्षक सेकुलर पार्टिया ही है |
देश में सिमी , इन्डियन मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठन इनके ही संरक्षण में फलते फूलते है |

पाकिस्तान हर क्वार्टर देश में बम धमाके करवाता था, सेकुलर पार्टियों के राज में |

क्या बीजेपी का कोई नेता एसा कुछ देश विरोधी करता है ? क्या बीजेपी एसे राष्ट्रविरोधियो को पालती है ? 

ये देश 712 से धर्म युद्ध लड़ रहा है और हर नागरिक इसमें एक सैनिक है |

यदि में न्यूट्रल रह कर अधर्म का साथ देता हु , तो मुझे भी कोई अधिकार नहीं है शिकायत करने का की देश में एसा वैसा बुरा क्यों हो रहा है, अगर में उस बुरे का विरोध नहीं करता |

बीजेपी धर्म के साथ है या नहीं ये मैं नहीं जानता , पर दूसरी पार्टिया अधर्म के साथ है ये में पक्का जानता हु |

ये मेरा और हर नागरिक का कर्त्तव्य है की वो राष्ट्रहित में जो है उसका साथ दे | 

और इसलिए में निशुल्क अपनी सेवाए बीजेपी को देता रहूँगा | न में बीजेपी आईटी सेल में हु , न मुझे बीजेपी से कोई पैसा मिलता है |

कोई तकलीफ हो तो ख़ुशी से मुझे ब्लाक कर दो, हम तो लिखते रहेंगे

अभिषेक शुक्ला

Gita Bodh - 1

गीता में काम की बात यह है कि अपने शत्रुओं का अंत कर। जीतेगा तो राज्य भोगेगा और मरेगा तो स्वर्ग मिलेगा। यही गीता का एसेंस है। गीता में चरखा है ही नहीं।

और लोगों ने गीता को अध्यात्म से जोड़ रखा है। ये सब ठगंत्री लोग हैं जो सिंपल बात को रहस्यवाद में उलझा कर माल बनाने में लगे हैं। ये लोग उस वार्तालाप में भी अध्यात्म ढूंढ लेते हैं जो रणक्षेत्र के बीच में हुआ था। और यदि अध्यात्म कुछ होगा भी तो वह युद्ध से ही निकला होगा जो उस वार्ता के बाद हुआ।

(बीच में. उसके बाद भी कुछ अध्यात्म बचा होगा तो शायद मुझ जैसे अध्यात्म की कमी वाले को समझ न आया होगा।)

जीतेगा तो राज्य भोगेगा। यह तो स्ट्रेट फौरबड्ड है। लेकिन मरेगा तो स्वर्ग भोगेगा यह ऐसे समझ में नहीं आएगा।

युद्ध की स्थिति कब आती है? जब शत्रु आपके जीवन को नर्क बना देता है। आपके बचाव के रास्ते बंद कर अस्तित्व पर संकट डाल देता है। उस स्थिति में आप नर्क ही भोग रहे होते हैं। जैसे शत्रु ने कश्मीर से भगा दिया। टैंट में पड़े रहे। एक कमरे में चार पांच का परिवार। कोई प्रायवेसी नहीं। दशकों बीत गए। परिवार की महिलाएं वेश्याएं बन गई। यही सब नर्क है।

जैसे हिंदू आज पाकिस्तान बांगलादेश में और भारत के बहुत स्थानों पर नर्क भोग रहा है। बांगलादेश में हिंदू परिवारों की मां बेटी पोती के साथ एक साथ रेप किया जा रहा है उनके बेटे बाप भाईयों के सामने। पूर्णिमा की मां हिजादीयों से कहती है कि मेरी बेटी छोटी है अभी, एक- एक कर रेप करो। इससे बड़ा क्या नर्क होगा।

और भारत में हिंदू के आराध्य राम का आपमान हो रहा है और हिंदू हीही-हूहू में रमा है। यह नर्क ही है।

तो एक बार सामना कर के लड़ते-2 या जीत जाना या मर जाना, दोनों स्थितियों में ऐसे निकृष्ट जीवन से मुक्ति मिल जाती है। मर कर नर्क जैसे जीवन से मुक्ति मिलना स्वर्ग ही है।

हिंदू किताबों को पूजता रहता है। किताबें पूजने की वस्तु नहीं है। अव्वल तो गीता कोई अलग पुस्तक है ही नहीं। महाभारत काव्य में से बीच से उठाया गया संवाद है। किसी वस्तु की असली पूजा उसका उपयोग है।

यदि आज तक आतंक का मजहब नहीं जान पाए तो तुम्हारा गीता-गीता करना मात्र ढोंग है।

Proud Bengali

बंगाल में भाजपा को वोट न देकर हमने मोदी का अहंकार तोड़ दिया। ये हमने कोई पहली बार नहीं किया है, इसी तरह पहले भी हमने साथ न देकर बड़ों-बड़ों का अहंकार तोड़ा है..

बहुत पहले सिंध के हिन्दू राजा दाहिर का अहंकार तत्कालीन अफगानिस्तान और राजस्थान के हिन्दू राजाओं ने खत्म किया था। दाहिर ने सहायता के लिये पत्र लिखा, पर कोई भी नहीं आया। बहुत अहंकार था दाहिर को अपने पराक्रम का, मारा गया। अब ये अलग बात है कि उसके बाद सिंध में हिन्दुओं का निरंतर पतन ही होता रहा और आज अफगानिस्तान पूर्णतः इस्लामिक राष्ट्र है।

इसी तरह हमने मुहम्मद गोरी के आक्रमण के समय पृथ्वीराज चौहान का साथ न देकर उनके अहंकार को तोड़ा था। अब अलग बात है कि बाद में गोरी ने जयचंद को भी कुत्ते की मौत मारा।

मेवाड़ वालों को भी अपनी बहादुरी का बड़ा अहंकार था। जब खिलजी ने मेवाड़ घेर लिया तब पूरे राजपूताने से किसी ने भी साथ नहीं दिया, रावल रतन धोखे से मारे गये और पद्मावती को 16000 औरतों के साथ जौहर करना पड़ा। पद्मावती को भी अपनी सुंदरता पर बड़ा अहंकार था, तोड़ दिया।

राणा सांगा ने जब लोधी को कैद किया था, तब उनके अहंकार को तोड़ने के लिये डाकू बाबर को बुलाया गया। युद्ध में किसी ने राणा सांगा का साथ नहीं दिया, 
उनका सेनापति तीस हजार सैनिकों के साथ मारा गया, 
सांगा का अहंकार टूट गया। लेकिन लोधियों को भी मुगलों की गुलामी करनी पड़ी, मन्दिर तोड़े गए, स्त्रियां लूटी मुगलों ने..पर सांगा का अहंकार तो टूट ही गया न।

मराठे बड़े प्रतापी थे, मुगलों की वाट लगा दी थी उन्होंने। उनको भी बहुत अहंकार था। मुगल हार गये तो काफिरों को रोकने के लिए अफगानिस्तान से अब्दाली बुलाया गया, पानीपत के मैदान में सेनाएं सज गयीं। 
अब्दाली की सेना को तो रसद मिलती रही पर मराठों को किसी ने भी रसद नहीं भेजी..अहंकार जो तोड़ना था मराठों का। 
भूखे पेट मराठे लड़ते रहे, मरते रहे..हार गये। 
महाराष्ट्र का कोई ऐसा घर नहीं जिसका कोई बेटा शहीद न हुआ हो, लेकिन अहंकार तो टूट गया न।

न जाने कितनी बार हमने समय पर साथ न देकर अपनों के अहंकार को तोड़ा है, तो हम मोदी को भी सत्ता से हटा कर रहेंगे। भले ही हमें इसके लिये गोरियों, मुगलों, अब्दालियों या फिर इटली, पाकिस्तान की मदद लेनी पड़े और देश को उनके हाथों गिरवी रखना पड़े..
हम मोदी का अहंकार तोड़ कर ही रहेंगे।

क्योंकि हम विदेशियों, विधर्मियों, वाममार्गियों आदि की ग़ुलामी में ही जीने के ही लायक़ हैं 😞
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